कतर में आखिर ऐसा क्या है?

1 साल में 4 बार विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की यात्रा!

Jan 2, 2025 - 18:21
कतर में आखिर ऐसा क्या है?

2024 के दिसंबर महीने में पीएम मोदी ने अपने आखिरी विदेश दौरे के लिए कुवैत को चुना था तो 2025 की शुरुआत में मोदी के 'चाणक्य' जयशंकर ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए कतर का चुनाव किया.
रूस, अमेरिका और चीन को एक साथ साधने की कला में पारगंत मोदी के चाणक्य कहे जाने वाले जयशंकर मुस्लिम देशों के साथ भारत के रिश्ते खास बनाने की मुहिम में लगे हुए हैं. इसी सिलसिले जयशंकर ने 2025 की पहली विदेश यात्रा के लिए एक बार फिर एक खास इस्लामिक मुल्क का दौरा किया. बड़ी बात ये है कि बीते एक साल में विदेश मंत्री की इस मुल्क की ये चौथी यात्रा थी. ये देश है कतर.

नए साल के मौके पर विदेश मंत्री ने 3 दिन कतर में गुजारे. इन 3 दिनों में उन्होंने कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया और कतर के अमीर शेख तमीम इब्न हमद अल थानी के भारत दौरे की तैयारियों को आखिरी रूप दिया. पिछले साल फरवरी में PM नरेंद्र मोदी ने अपनी कतर यात्रा के दौरान शेख अल थानी को भारत आने का न्यौता दिया था.

बतौर डिप्लोमेट अपनी अलग पहचान बनाने वाले एस जयशंकर अब अपनी फॉरेन पॉलिसी के मामले में भी दुनिया में जाने जाते हैं. बीते एक साल में चौथी बार और बीते 6 महीने में तीसरी बार दोहा पहुंचे हैं. इससे ये उम्मीद जताई जा रही है कि 2023 में जासूसी के आरोप में दोषी ठहराए गए 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों में से बचे हुए एक अधिकारी की भी अब वापसी हो सकती है.

कतर में आखिर ऐसा क्या है? 
सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015, 2016 और 2024 में क़तर की यात्रा की.जहां उनकी क़तर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाक़ात हुई थी. इसके अलावा सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र आम सभा और दिसंबर 2023 में दुबई में हुए जलवायु सम्मेलन में भी दोनों नेताओं की मुलाक़ात हुई थी. ऐसे में सवाल है कि कतर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतनी तवज्जो क्यों दे रहे हैं? और क़तर भारत के लिए कितना अहम है?


भारत-कतर के रिश्ते
कतर खाड़ी का पावरफुल मुल्क है.उसके साथ भारत का व्यापारिक रिश्ता भी बहुत शानदार है. 2023-24 में दोनों देशों के बीच 14.08 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. कतर में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं. वहां उनकी संख्या 8 लाख से अधिक है, जो कतर में रहने वाला सबसे बड़ा विदेशी समुदाय है. कतर की अपनी आबादी मात्र 30 लाख है. वहां के लोगों की औसत आय 1.17 लाख डॉलर यानी करीब 1,00,26,686 रुपये प्रति व्यक्ति है.

इस्लामिक मुल्कों से घनिष्ठ होते भारत के रिश्ते
पश्चिमी एशिया से रिश्तों को मजबूत करने के लिए भारत द्वारा की जा रही यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों कुवैत का दौरा किया था जबकि विदेश मंत्री जयशंकर ने बहरीन और कतर का दौरा किया.इसके अलावा वह अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने हाल के महीनों में दिल्ली का दौरा किया. कतर के अमीर की भारत यात्रा के बाद जयशंकर ओमान जाने का कार्यक्रम बना रहे हैं. जबकि 2 जनवरी को भारत,  ईरान के उप विदेश मंत्री तकत रवांची का स्वागत करेगा. 2025 में ईरान के किसी अधिकारी का ये भारत का पहला कूटनीतिक दौरा है, इस दौरे में रवांची विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मिलेंगे.

 ट्रंप, टेंशन और कन्फ्यूजन!

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद यूरोप से लेकर मध्य पूर्व तक कन्फ्यूजन बना हुआ है कि ट्रंप किस मामले में कब और क्या रुख़ अख्तियार कर लें, कहा नहीं जा सकता. ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद ईरान पर कड़े एक्शन की आशंका है, जिसका असर भारत पर शायद पड़ भी सकता है. ऐसे में कतर और अन्य मुस्लिम देश भारत के लिए मददगार साबित हो सकते हैं.