रूस के राष्ट्रपति पुतिन का यह भारतीय दौरा क्यों है खास
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज भारत के दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। पालम तकनीकी हवाई अड्डे पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें लेने पहुंचे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से गर्मजोशी के साथ मुलाकात की और पारंपरिक तरीके से गले मिले। इसके बाद वे एक ही बुलेटप्रूफ टोयोटा एसयूवी में सवार होकर एयरपोर्ट से सीधे 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना हुए। पूरा सफर महज कुछ ही मिनटों में पूरा हुआ।
यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा है। आज रात प्रधानमंत्री मोदी उनके सम्मान में निजी रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे, जिसमें सिर्फ दोनों नेता और चुनिंदा लोग ही मौजूद रहेंगे। कल दोनों के बीच 22वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता होगी, जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, पर कई बड़े समझौते होने की संभावना है।
पुतिन के आने से पहले ही रूसी प्रतिनिधिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य दिल्ली पहुंच चुके हैं। इनमें रूस के उप प्रधानमंत्री और उद्योग-व्यापार मंत्री डेनिस मांतुरोव, रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और कृषि मंत्री दिमित्री पात्रुशेव शामिल हैं। ये सभी मंत्री कल होने वाली विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पुतिन का स्वागत करते हुए लिखा, “अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन का भारत में हार्दिक स्वागत है। आज शाम और कल होने वाली हमारी विस्तृत चर्चा का इंतजार है। भारत-रूस मैत्री ने कठिन समय की हर परीक्षा पास की है और दोनों देशों के लोगों को इसका सीधा लाभ मिला है।”
दोनों नेताओं का एक ही गाड़ी में साथ यात्रा करना भी काफी कुछ कहता है। कुछ महीने पहले चीन के तियानजिन में BRICS सम्मेलन के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी राष्ट्रपति लिमोजिन औरंगजेब में साथ बैठाया था। इस बार दिल्ली में मोदी ने ठीक वैसा ही आतिथ्य दिखाया। यह छोटी-छोटी बातें दोनों देशों के बीच गहरे व्यक्तिगत और राजनयिक रिश्ते को दर्शाती हैं।
कुल मिलाकर यह यात्रा सिर्फ औपचारिक नहीं है। पश्चिमी देशों के भारी दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखा है। आने वाले दो दिन में दोनों देश परमाणु ऊर्जा, रक्षा सह-उत्पादन, तेल-गैस व्यापार, अंतरिक्ष सहयोग और भुगतान व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ठोस फैसले ले सकते हैं।