यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार राष्ट्रपति पुतिन भारत आ रहे हैं
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज शाम करीब 6:30 बजे भारत आने वाले हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये उनकी पहली भारत यात्रा है। करीब 30 घंटे के इस छोटे से दौरे में पीएम मोदी उनके लिए प्राइवेट डिनर रख रहे हैं। असल में ये दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि इस साल भारत-रूस की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के 25 साल पूरे हो रहे हैं। साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी और पुतिन ने इसकी नींव रखी थी।
कल दोनों देशों के बीच 9 बड़े समझौते होने की उम्मीद है। सबसे अहम बात ये है कि भारत रूस से और ज्यादा S-400 सिस्टम और उसका नेक्स्ट जनरेशन S-500 खरीद सकता है। मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स को मार गिराया था, जिससे ये सिस्टम भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ।
इसके अलावा स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, साइंस-टेक्नोलॉजी, ट्रेड और पोर्ट डेवलपमेंट पर भी बात होगी। तमिलनाडु का कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट रूस की मदद से ही चल रहा है, उसको और आगे बढ़ाने की चर्चा होगी।
एक नया मौका ये भी है कि रूस में युद्ध की वजह से कई सेक्टर में वर्कर्स की कमी हो गई है। वो चाहते हैं कि भारत से इंजीनियर, डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन जैसे स्किल्ड लोग वहाँ काम करें। करीब 10 लाख भारतीयों के लिए रूस में जॉब का रास्ता खुल सकता है। ये मोबिलिटी एग्रीमेंट होगा। अभी तक भारत का ऐसा समझौता सिर्फ जर्मनी और इजरायल के साथ है।
तेल और पेमेंट का मसला भी बड़ा रहेगा। युद्ध के बाद भारत रूस से 2.5% से बढ़ाकर 35% तक क्रूड ऑयल खरीदने लगा था क्योंकि रूस डिस्काउंट दे रहा था। अमेरिका को ये पसंद नहीं आया और ट्रंप ने भारतीय सामान पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। नतीजा ये हुआ कि भारत ने रूसी तेल थोड़ा कम कर दिया। अब पुतिन चाहते हैं कि भारत फिर से पहले जैसी खरीदारी करे। इसके लिए रुपया-रूबल में ट्रेड, डिजिटल पेमेंट या किसी तीसरे देश के बैंक से पेमेंट का नया सिस्टम बन सकता है। साथ ही रूस भारत को आर्कटिक में अपने बड़े ऑयल-गैस प्रोजेक्ट्स में निवेश का ऑफर दे सकता है।
सबसे ताजा और अहम खबर ये है कि भारत ने रूस से एक परमाणु पनडुब्बी (न्यूक्लियर अटैक सबमरीन) 10 साल की लीज पर लेने की डील लगभग पक्की कर ली है। कीमत करीब 2 अरब डॉलर है। इसे युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, सिर्फ ट्रेनिंग और अपनी न्यूक्लियर सबमरीन बनाने की क्षमता बढ़ाने के लिए मिलेगी। दो साल में सबमरीन भारत पहुँच जाएगी। ये बातचीत दस साल से कीमत पर अटकी थी, अब जाकर सुलझ गई।
कुल मिलाकर ये छोटा सा दौरा है, लेकिन दोनों देशों के लिए कई बड़े फैसले और मौके लेकर आ रहा है।