राजनाथ सिंह: नेहरू चाहते थे बाबरी मस्जिद निर्माण सरकारी पैसे से कराएं, पटेल ने रोका
रक्षा मंत्री ने दावा किया कि पटेल के निधन के बाद उनके स्मारक के लिए जनता की जुटाई राशि को नेहरू ने 'कुएं और सड़क निर्माण' में लगाने का सुझाव दिया था, जो बिल्कुल बेतुका था।
दरअसल राजनाथ ने ये बयान गुजरात के वडोदरा में दिया है। वे सरदार पटेल की 150वीं जयंती को लेकर गुजरात सरकार की यूनिटी मार्च में शामिल हुए। उन्होंने साधली गांव में सभा को संबोधित किया। यूनिटी मार्च करमसाड़ (सरदार पटेल का जन्मस्थान) से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक निकाली जा रही है। जो 6 दिसंबर को समाप्त होगी।
- 1946 में अधिकांश कांग्रेस समितियों ने वल्लभभाई पटेल को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था। गांधीजी के आग्रह पर पटेल ने अपना नाम वापस ले लिया और नेहरू अध्यक्ष बने। अगर पटेल प्रधानमंत्री बनते तो कश्मीर की स्थिति अलग होती। अनुच्छेद 370 हटाना ऐतिहासिक निर्णय रहा है।
- वल्लभभाई पटेल संवाद में विश्वास करते थे, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाते थे, से हैदराबाद एकीकरण के समय हुआ था। मौजूद केंद्र सरकार ने भी ऑपरेशन सिंदूर के जरिए वही संदेश दिया कि भारत शांति चाहता है, पर उकसावे पर करारा जवाब देगा।
- नेहरू ने खुद को भारत रत्न से सम्मानित किया, लेकिन उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत रत्न से सम्मानित क्यों नहीं किया गया? PM नरेंद्र मोदीजी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर सरदार पटेल को सही सम्मान देने का फैसला किया। यह हमारे PM का सच में तारीफ के काबिल काम है।
- मोरारजी देसाई 80 साल से ज्यादा के थे। अगर वह भारत के प्रधानमंत्री बन सकते थे, तो सरदार पटेल, जो 80 साल से कम उम्र के थे, क्यों नहीं बन सकते थे? ये बात पूरी तरह से गलत है कि पटेल को पीएम इसलिए नहीं बनाया गया कि वे बहुत बूढ़े हो गए थे।