सब 'आप'के साथ, अकेला पड़ा 'हाथ'
लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ बना इंडिया गठबंधन दिल्ली विधानसभा चुनाव आते-आते लगभग टूट गया है. गठबंधन के ज्यादातर दल राहुल गांधी और कांग्रेस की जगह केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर भरोसा जता रहे हैं.
अगले महीने दिल्ली में विधानसभा का चुनाव होना है और वोटिंग से पहले इंडिया गठबंधन में कांग्रेस पूरी तरह से अकेली पड़ती जा रही है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुलकर केजरीवाल के सपोर्ट में खड़े है तो वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अरविंद केजरीवाल को समर्थन का ऐलान किया है. इंडिया गठबंधन की एक और सहयोगी उद्दव ठाकरे शिवसेना ने ने आम पार्टी को समर्थन कांग्रेस को नसीहत दे दी. शिवसेना UBT की तरफ से कहा गया कि कांग्रेस को दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल पर हमलावर नहीं होना चाहिए नहीं तो इसका फायदा बीजेपी को हो जायेगा. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि इंडिया अलायंस सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए था. देश में अलायंस खत्म हो चुका है. दिल्ली चुनाव में कांग्रेस और AAP के बीच तालमेल नहीं होना अस्वाभाविक बात नहीं है.
कांग्रेस के लिए चिंता का सबब
इंडिया गठबंधन के इन चारों सहयोगी दलों के कांग्रेस की जगह आप को समर्थन देने के फैसले से भले ही दिल्ली के चुनाव में कांग्रेस की जमीनी राजनीति पर भले कोई फर्क नहीं पड़े लेकिन मोदी से लड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की सियासत के लिहाज से इन पार्टियों का रूख कांग्रेस की चिंता का सबब जरूर बना रहेगा. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि कांग्रस इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है.
साथियों ने छोड़ा हाथ तो अपने ही देने लगे ज्ञान!
महाराष्ट्र के सीनियर कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण का कहना है कि उनको उम्मीद है कि दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल को जीत मिलेगी. इसके साथ ही कांग्रेस को उन्होंने आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने की सलाह दे डाली. उनके बयान से एक बात तो साफ हो गई है कि सर्फ साथी दल ही नहीं अपनी ही पार्टी के नेताओं को भी दिल्ली के लिए कांग्रेस की रणनीति खास पसंद नहीं आई है.