फजल-उर-रहमान का बड़ा हमला: ‘पाकिस्तानी आर्मी ने 90,000 सैनिकों के साथ हिंदू जनरल के सामने सरेंडर किया’
मौलवी ने कहा कि पाकिस्तान अभी तक उस शर्मनाक हार से उबर नहीं पाया है, क्योंकि आज भी उसी सोच के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, आर्मी अपनी गलतियां छिपाती है, जनता से सच नहीं बताती और नेताओं पर दबाव डालती है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की लड़खड़ाती इकॉनमी, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी भी आर्मी की नाकाम पॉलिसी का नतीजा है।
रहमान ने कहा कि जो लोग देश को इस मुकाम पर लाए हैं, वे खुद को हीरो दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता सब जानती है और उसे बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। मौलाना लंबे समय से पाकिस्तान की सरकार और मिलिट्री की आलोचना करते रहे हैं। वह कई बार पार्लियामेंट के मेंबर रह चुके हैं और उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का कट्टर विरोधी माना जाता है। 2019 में, उन्होंने इमरान खान सरकार के खिलाफ "आज़ादी मार्च" का नेतृत्व भी किया था।