मनरेगा खत्म करना गांवों के लिए विनाशकारी: सोनिया गांधी

Dec 22, 2025 - 15:51
मनरेगा खत्म करना गांवों के लिए विनाशकारी: सोनिया गांधी

कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने से गांवों में रहने वाले लाखों लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने मनरेगा को खत्म करने को एक सामूहिक विफलता बताया और सभी से इसके खिलाफ एकजुट होने की अपील की। ​​सोनिया गांधी का यह बयान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल को मंजूरी देने के बाद आया है, जो मनरेगा की जगह लेगा। यह नया कानून ग्रामीण मजदूरों को 125 दिन के काम की गारंटी देता है। सोनिया गांधी ने ये बातें एक अंग्रेजी अखबार में 'मनरेगा का बुलडोजर से विध्वंस' शीर्षक वाले अपने कॉलम में कही हैं।

कॉलम में सोनिया के चार आरोप:

रोजगार गारंटी कानून को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया: सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के सर्वोदय, यानी 'सभी के कल्याण' के विचार पर आधारित था। इसने काम के अधिकार को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को संकट से निपटने के लिए बनाया गया यह रोजगार गारंटी कानून बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया है। मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 41 से प्रेरित था, जो नागरिकों को काम का अधिकार देने की बात करता है। सोनिया ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी चर्चा, सलाह या संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान किए बिना इस योजना को खत्म कर दिया। महात्मा गांधी का नाम हटाना तो सिर्फ शुरुआत थी, असल में पूरी योजना को ही खत्म कर दिया गया है।

नया कानून एक नौकरशाही ढांचा है: सोनिया ने नए कानून को एक नौकरशाही ढांचा बताया। उन्होंने दावा किया कि अब इस योजना का दायरा केंद्र सरकार के विवेक पर होगा। पहले कोई बजट सीमा नहीं थी। अब एक निश्चित बजट होगा, जो राज्यों में काम के दिनों की संख्या को सीमित करेगा। इससे साल भर रोजगार की गारंटी खत्म हो जाएगी। सोनिया ने कहा कि मनरेगा की सबसे बड़ी सफलता यह थी कि इसने ग्रामीण गरीबों, खासकर भूमिहीन मजदूरों की मोलभाव करने की शक्ति को बढ़ाया और मजदूरी में सुधार किया। नया कानून इस शक्ति को कमजोर करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों की मजदूरी में बढ़ोतरी को रोकना चाहती है, जबकि आजादी के बाद पहली बार कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ा है। रोजगार को 100 से 125 दिन बढ़ाने का दावा झूठा है: उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून के ज़रिए राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ डालकर सरकार इस योजना के तहत काम देने की उनकी क्षमता में रुकावट डाल रही है। राज्यों की वित्तीय स्थिति पहले से ही खराब है, और इससे यह और भी खराब होगी। सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार यह झूठा दावा कर रही है कि रोजगार को 100 से 125 दिन बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 10 सालों में फंड रोककर, तकनीकी दिक्कतें पैदा करके और मजदूरों को पेमेंट में देरी करके MGNREGA को कमजोर किया है।

MGNREGA को खत्म करना संविधान पर हमलों का हिस्सा है: अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि काम के अधिकार को खत्म करना संविधान पर लगातार हो रहे हमलों का हिस्सा है। वोट का अधिकार, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, वन अधिकार अधिनियम और भूमि अधिग्रहण अधिनियम को भी कमजोर किया गया है। उन्होंने सरकार पर तीन कृषि कानूनों के ज़रिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का अधिकार छीनने का आरोप लगाया, और अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम भी खतरे में है।

विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी (VB-G-RAM-G) बिल 20 साल पुराने MGNREGA की जगह लेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 21 दिसंबर को बिल को मंजूरी दी, जिसके बाद VB-G-RAM-G बिल कानून बन गया।

संसद में 14 घंटे की चर्चा के बाद यह बिल पास हुआ।

केंद्र सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान VB-G-RAM-G बिल पेश किया था। यह बिल 16 दिसंबर को लोकसभा और 18 दिसंबर को राज्यसभा में पास हुआ था। विपक्ष ने भी इस बिल के खिलाफ संसद परिसर में मार्च निकाला था। इसमें 50 से ज़्यादा विपक्षी सांसदों ने हिस्सा लिया और VB-G-RAM-G बिल वापस लेने की मांग करते हुए नारे लगाए। TMC सांसदों ने भी संसद परिसर में रात भर विरोध प्रदर्शन किया।